तस्वीर कुछ बोलती है, बहुत से राज़ खोलती है,
यादों को टटोलती है, दिल के ज़ख़्म भी खोलती है।
कभी-कभी हमारी आँखें भी इसे देख कर नम हो जाती हैं,
और जब पलकों पर पर्दा गिरता है,
तो तस्वीर किसी कोने में टंग कर
चुपचाप हमें ताकती रह जाती है।
सच तो ये है—
लम्हे बीत जाते हैं, मगर तस्वीर रह जाती है,
क्योंकि तस्वीर बोलती है।
हर दिन कितनी तस्वीरें हम देखते हैं,
ये सिर्फ इंसानों का आकार नहीं,
बल्कि हक़ीक़त से रूबरू कराती हैं।
यादों के आईने में झांकने देती हैं,
क्योंकि तस्वीर… सच में बोलती है।

