कर हौसलों को बुलंद, अब ले अपना फ़ैसला,
बहुत हो गई ठोकरें, अब खुद से कर वास्ता।
रास्तों में फासले हैं, मुश्किलें भी बेहिसाब,
पर तेरे अंदर जल रहा है, एक अधूरा सा ख़्वाब।
कल की तू फ़िक्र ना कर, आज को अपना बना,
जो भी दिल से चाहता है, उसकी तरफ बढ़ चला।
लोग क्या कहेंगे तुझसे, ये दुनिया का सिलसिला,उन्हें बस जानना है, क्यों बदला तूने रास्ता।
पर जब दिल से ले लिया है, तूने अपना फ़ैसला,तो पूरा करके दिखाना, यही असली हौसला।
तू नहीं बना है सिर्फ़, समाज के उसूलों के लिए,तेरे अंदर एक जुनून है, नई मंज़िलों के लिए।
गिर के उठना सीख ले, यही ज़िंदगी का राज़ है,जो अकेला चल पड़ा, वही असली बाज़ है।
छू ले अब ऊँचाइयों को, आसमान भी झुकेगा,तेरे सपनों का सूरज, एक दिन ज़रूर निकलेगा।
सिद्धांत जय सक्सेना
संस्थापक,
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