जब गुरु की लिखी कोई रचना पढ़ने को मिलती है, तो वह केवल कहानी नहीं रहती, बल्कि एक गहरा अनुभव बन जाती है। हिंदी साहित्य की संवेदनशील और सशक्त रचनाशील परंपरा के महत्वपूर्ण हस्ताक्षर आदरणीय डॉ. प्रेम कुमार मेरे न केवल गुरु रहे हैं, बल्कि मेरे साहित्यिक व्यक्तित्व को गढ़ने वाले श्रेष्ठ मार्गदर्शक भी हैं। उनके स्नेहमय सान्निध्य और मार्गदर्शन में अपना शोधकार्य पूर्ण करना मेरे लिए सौभाग्य रहा। संभवतः यही कारण है कि उनकी हर रचना मेरे लिए साहित्यिक पाठ मात्र नहीं, बल्कि सीख, संवेदना और भावनात्मक जुड़ाव का उजला अनुभव बन जाती है। उनकी नवीनतम कहानी “चाँदनी-सी बातें” भी इसी परंपरा की एक सुकोमल, जीवंत और मन को छू लेने वाली कड़ी है।
यह कहानी पढ़ते हुए ऐसा अनुभव होता है जैसे रिश्तों और भावनाओं की उजली चाँदनी मन पर धीरे-धीरे उतरती चली जाए। कहानी किसी बड़े कथानक या नाटकीय घटनाओं पर नहीं टिकी, बल्कि जीवन के सहज, सरल और अत्यंत मानवीय क्षणों से अपना अर्थ गढ़ती है। बच्चे की मासूम दुनिया, उसकी जिज्ञासाएँ, उसके छोटे-से प्रश्न और भीतर छिपी भावनाएँ जब बड़े के अनुभव, संवेदना और समझ से मिलती हैं, तो जीवन का एक सुंदर सत्य सामने आता है। डॉ. प्रेम कुमार की लेखनी की खासियत यह है कि वे बिना किसी शब्दाडंबर के बहुत बड़ी बात सहजता से कह देते हैं। उनकी भाषा सुघड़, स्वाभाविक और दिल को छू लेने वाली है, जिससे कहानी पढ़ने के बजाय जी हुई प्रतीत होती है।इस कहानी का सबसे बड़ा सौंदर्य उसका संदेश है। यह कहानी हमें बहुत गहराई से यह एहसास कराती है कि बच्चों की बातें कभी छोटी नहीं होतीं। उनके सरल लगने वाले प्रश्नों में भावनाओं की दुनिया बसती है। हम बड़े अक्सर अपनी अपेक्षाओं, अपनी समझ और अपने अनुशासन को ही सही मान लेते हैं, किंतु यह कहानी सिखाती है कि केवल समझाना पर्याप्त नहीं, पहले समझना आवश्यक है। केवल निर्देश देना ही संबंध नहीं, बल्कि संवाद निभाना भी उतना ही अनिवार्य है। बच्चों की खुशियों, भावनाओं और उनके आत्मसम्मान को महत्व देना ही सच्ची शिक्षा और सच्चे पालन-पोषण का आधार है। यही इस कहानी का सशक्त, जीवन से जुड़ा और अत्यंत प्रासंगिक संदेश है।
कुल मिलाकर “चाँदनी-सी बातें” केवल एक साहित्यिक रचना नहीं, बल्कि मन को शीतलता देने वाली वह रोशनी है जो रिश्तों में कोमलता, संवेदनाओं में गहराई और सोच में मानवीयता का प्रकाश भर देती है। एक शिष्य होने के नाते इस रचना को पढ़ना मेरे लिए गर्व, आत्मीयता और सीख तीनों का अद्भुत संगम रहा। सचमुच, डॉ. प्रेम कुमार की यह कहानी अपने नाम की तरह ही शांत, उजली, कोमल और हृदय को आलोकित करने वाली है।
कहानी | चाँदनी-सी बातें
डॉ. सुनीता सक्सेना

