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पन्ने पलटे हैं, क्या हम भी?

साल बीत गया, ज़िंदगी का एक पन्ना पलट गया,पर सवाल अब भी वही है—क्या हम सच में बदल गए?

जश्न किस बात का, अगर आज भी हम वही हैं जो बीते साल में थे?

क्यों न इस बार शोर नहीं,थोड़ा ठहराव चुनें और ज़िंदगी की किताब को सच में ख़ूबसूरत बनाएँ।

सिद्धांत की क़लम से

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