न कह सके हम

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खामोशी ही ले डूबी हमें, कह न सके जज़्बात, इंतज़ार में रहे मगर, रह गई अधूरी रात।

अब सोच कर भी क्या करें, जब तुम हो किसी और की अमानत, बस अफ़सोस इतना है जनाब, न कह सके दिल की हालत।

याद तुम्हारी आती है अक्सर, पर मजबूर है ये दिल हमारा, सच्चा था प्यार इसीलिए, दुआ है तुम्हें सुख-संसारा।

ज़िंदगी की कुछ बातें अब सीने में दफ़्न हैं, दर्द तो बहुत है मगर, हम दिखाते नहीं हैं।

बुरे तो हम न थे, हालात के थे मारे, कशमकश-ए-ज़िंदगी में उलझे रहे बेचारे।

तुम्हारे जाने के बाद दिल की पहचान ही खो गई, अब धड़कनों से भी हमें वफ़ा की आवाज़ न आई।

गुज़ारिश बस इतनी है, यादों में हमें ज़रूर रखना, मोहब्बत अधूरी सही, पर दोस्ती की जगह दिल में रखना।

भुलाना आसान नहीं, ज़िंदगी अब आसान कहाँ है, शर्म ने रोक लिया हमें, तन्हाई ही पहचान कहाँ है।

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